Prasad
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इस पुस्तक का छपा शीर्षक आत्म-साक्षात्कारी महापुरुष का उदाहरण है और इसमें दस बातें नामक एक छोटी पुस्तिका दी गई है। शीर्षक-पृष्ठ पर अनुक्रम में पहली बात से दसरी बात तक के प्रकरण पृष्ठ-संख्याओं के साथ दिए गए हैं। पैमाना लगभग 13 पृष्ठ का है।
पृष्ठ पर बताया गया है कि भगवान कालरामी, लीलामयी, अनुमिहनी शिव के आचार्य बुद्धि में स्थिर करो, अपने मन को भगवदाभिमुख बनाओ और इन्द्रियों को विफलता के मार्ग से मोड़कर निरन्तर भगवान के प्रेमोद्देश में निमन करो। साथ में यह भी दर्ज है कि जीवन में आप जो कुछ करते हो उसका प्रभाव आपके अंतःकरण पर पड़ता है, इसलिए हर कार्य करते समय उसका प्रभाव अपने जीवन पर होने वाले परिणाम को सूक्ष्मता से निहारना चाहिए।
पृष्ठ पर यह बताया गया है कि आत्मनिरीक्षण के लिए कसौटी के रूप में दस बातें यहाँ बताई गई हैं, जिनके द्वारा अपने जीवन को परिष्कृत करके महान बनाया जा सकता है, और इन्द्रियों के स्वच्छन्द आवेगों को रोककर बुद्धि को सत्यःवाक् आत्मा-परमात्मा में स्थित करने का उल्लेख भी है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- प्रसाद तथा भगवद्-कृपा
- भक्ति तथा आत्म-समर्पण
- कथाएँ तथा प्रसंग
- प्रेरक उपदेश
पुस्तक की मुख्य बातें
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