Sachcha Sukh
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यह पुस्तक सच्चा सुख नाम से प्रकाशित हुई है, जो प्रातःस्मरणीय पूज्यपाद संत श्री आसारामजी महाराज के सत्संग-प्रवचनों का संकलन है। शीर्षक-पृष्ठ पर एक चित्र-आवरण चिपका हुआ है, जिसमें सूर्यास्त का नारंगी प्रभाव और बाद में पूज्य बापू का चित्र दिया गया है, और नीचे शीर्षक निश्चिन्त जीवन के रूप में बड़े अक्षरों में दोहराया गया है। पैमाना लगभग 53 पृष्ठ का है।
पृष्ठ पर इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि ब्रह्म तथा आत्मा के आपसी सम्बन्धों को लेकर आत्म-ज्ञान की विचार-धारा का सूक्ष्म सार प्रस्तुत किया गया है, और आत्म-ज्ञान की मूल्यवान शिक्षा के साथ मुक्ति की शिक्षा भी इसी पुस्तक में दी गई है।
पुस्तक के अन्तिम पृष्ठ पर सच्चा सुख का प्रश्न उठाकर बताया गया है कि जिसने साधना को जीवन में ढाल लिया है वह अपने भीतर पहुँचकर उस शक्ति से युक्त होता है, जिसके कारण अब उसे दर्शन की आवश्यकता नहीं रहती, और वह इस जीवन में प्रेम की भावना से युक्त होकर जीवनयापन कर सकता है। यह पुस्तक साधक-पाठकों के लिये उपयोगी है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- सच्चे सुख का स्वरूप
- सांसारिक तथा आध्यात्मिक सुख
- भक्ति तथा संतोष
- प्रेरक निर्देश
पुस्तक की मुख्य बातें
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