Shri Krishna Janamashtami
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यह पुस्तक श्रीकृष्ण-जन्माष्टमी नाम से प्रकाशित हुई है और यह पूज्यपाद संत श्री आसारामजी बापू के सत्संग प्रवचन पर आधारित है। आवरण-चित्र में बाल-कृष्ण का सजीव चित्र बना है, जिसमें वे माखन-घड़ौले के साथ खेल रहे हैं। पैमाना लगभग 38 पृष्ठ का है।
आवरण-पृष्ठ के नीचे एक पद भी छपा है, जिसमें लिखा है कि आवार किशोरी को छोड़कर, यह नट कर्म कुछ नहीं देता, और माता-पिता को संतोष नहीं करता, परन्तु सन्तान पाप-कर्म से बच जाते हैं। पृष्ठ पर यह भी बताया गया है कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का आयोजन श्री अरुण प्रसाद ने किया है और भगवान श्रीरामचन्द्रजी मानते हैं कि उनके आशीर्वाद से ही यह प्रकाशन सम्भव हो पाया।
अनुक्रम में ब्रह्म-जन्म-संबंध, जन्माष्टमी का तात्पर्य, जन्म का ही प्रयोग, रामानुज संदर्भ, श्रीकृष्ण का गुरुदेव, प्रेम के पुजारी और श्रीकृष्ण की समता जैसे प्रकरण आते हैं। यह पुस्तक सत्संग-पाठकों के लिए उपयोगी है, और जन्माष्टमी के सत्संग-प्रवचनों को एकत्र करती है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- जन्माष्टमी व्रत तथा महत्व
- श्रीकृष्ण की लीलाएँ
- पूजा-विधि तथा नियम
- भक्ति तथा प्रसंग
पुस्तक की मुख्य बातें
डाउनलोड कैसे करें — बस 3 कदम
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