Swami Rama Tirtha Granthavali – 19
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यह पुस्तक स्वामी रामतीर्थ का भाग उन्नीसवाँ है, जिसमें उनके सदुदेश-भाग १९ का पाठ दिया गया है। पैमाना लगभग 163 पृष्ठ का है।
आवरण पर ॐ के नीचे भाग उन्नीसवाँ लिखा है और नीचे परमहंस स्वामी रामतीर्थ का चित्र तथा प्रकाशक श्री रामतीर्थ पब्लिकेशन लीग, लखनऊ का नाम दिया गया है।इस भाग में स्वामी रामतीर्थ के सदुदेश का उन्नीसवाँ भाग दिया गया है, जिसमें उनके द्वारा प्रतिपादित दार्शनिक और आत्मज्ञान-सम्बन्धी विचारों का संकलन मिलता है, और उनके आत्मज्ञान-अनुभव का वर्णन भी मिलता है। यह भाग उनकी ग्रन्थावली की लगातार चलती हुई पंक्ति का हिस्सा है, जिसके प्रत्येक भाग में स्वामी रामतीर्थ के स्वयं लिखे हुए प्रवचन दिए गए हैं।
शीर्षक-पृष्ठ पर प्रथम संस्करण की तारीखें जनवरी १९२६ और माघ १९७७ दर्ज हैं तथा प्रति २०००, फुटकर बिना जिल्द, डाक व्यय रहित अथवा फाजिल्ट संस्करण का उल्लेख भी है। इस भाग में स्वामी रामतीर्थ के सदुदेश का उन्नीसवाँ भाग दिया गया है, जिसमें उनके द्वारा प्रतिपादित दार्शनिक और आत्मज्ञान-सम्बन्धी विचारों का संकलन मिलता है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- स्वामी रामतीर्थ की रचनाएँ (भाग 19)
- प्रवचन तथा कविता
- अद्वैत तथा भक्ति
- प्रेरक विचार
पुस्तक की मुख्य बातें
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