Swami Rama Tirtha Granthavali – 25
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यह पुस्तक श्री रामतीर्थ ग्रन्थावली का पहला खंड है, जिसमें स्वामी रामतीर्थ का सदुदेश-भाग २५ दिया गया है। पैमाना लगभग 165 पृष्ठ का है।
शीर्षक-पृष्ष्ट पर प्रकाशक श्री रामतीर्थ पब्लिकेशन लीग, लखनऊ अंकित है, साथ में फरवरी १९२४ और फाल्गुन १९८० की तारीखें तथा फुटकर बिना जिल्द अथवा सजिल्ट्ट संस्करण का उल्लेख भी है।इस भाग में स्वामी रामतीर्थ के सदुदेश का पच्चीसवाँ भाग दिया गया है, जिसमें वेदान्त-सम्बन्धी प्रश्नोत्तर, संस्कार तथा मानव-जीवन पर चर्चा मिलती है, और छपाई का विवरण अंग्रेज़ी में दिया गया है। विषय-सूची में प्रत्येक प्रकरण का पृष्ठ-अंक भी दिया गया है।
अगला पृष्ठ विषय-सूची है, जिसमें शही-खुद्दा शाह और बसन्त-खातंज्याचार का सम्बन्ध, बसन्त-खातंज्याचार और दहि-सुहृदि बाद, वेदान्त पर कुछ प्रश्नों के उत्तर, माया अथवा दुनिया का कब और क्यों, संस्कार का आरम्भ कब हुआ, सौमेह और वेदान्त तथा मनुष्य मानव का आप ही स्वामी है जैसे प्रकरण पृष्ठ-संख्याओं के साथ दिए गए हैं, और नीचे छपाई का विवरण अंग्रेज़ी में आया है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- स्वामी रामतीर्थ की रचनाएँ (भाग 25)
- प्रवचन तथा कविता
- अद्वैत तथा भक्ति
- प्रेरक विचार
पुस्तक की मुख्य बातें
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