पलाश (ढाक) के 76 दिव्य फायदे, गुण और उपयोग – Palash (Dhaak) ke Fayde in Hindi

Last Updated on January 12, 2024 by admin

परिचय :

भारत में टेसू (पलाश) का पेड़ सभी स्थान पर पाए जाते हैं। प्राचीन समय से इसका प्रयोग उपचार के लिए औषधि के रूप में किया जाता है। टेसू के पेड़ 150 से 450 सेंटीमीटर तक ऊंचे होते हैं। इसके पत्ते लगभग 6 इंच लम्बे होते हैं। इसकी छाल आधा इंच मोटी और खुरदरी होती है। गर्मियों के मौसम में इसकी छाल को काटने पर एक प्रकार का रस निकलता है जो जमने पर लाल गोंद जैसा पदार्थ बन जाता है। पलास के फूल चमकीले लाल व नारंगी रंग के होते हैं।

पलाश का विभिन्न भाषाओं में नाम :

हिंदी       ढाक, पलाश, टेसू।
संस्कृत   पलास, किंशुक, ब्रह्मपादप, याज्ञिक, ब्रंहमवृक्ष, रक्तपुष्पक, याज्ञिक।
गुजरातीखाखरो।
मराठीपलस।
बंगाली पलाश।
तैलगुमोदुग।
मारवाड़ीछिबरो।
द्राविड़ीपेलाशं।
कन्नड़मुत्तुग

रासायनिक संघटन :

पलाश की छाल और गोंद में गैलिक ऐसिड, काइनोटैनिका ऐसिड, पिच्छिल द्रव्य तथा क्षार पाये जाते हैं। इसके बीजों में पलोसोनिन तथा स्थिर तेल पाया जाता है।

पलाश के गुण : 

  • पलाश के फूल का सेवन करने से शरीर को शक्ति मिलती है और प्यास दूर होती है। 
  • इसके सेवन से शरीर में खून की वृद्धि होती है, पेशाब खुलकर आता है।
  •  कुष्ठरोग, मौसमी बुखार, जलन, खांसी, पेट में गैस बनना, वीर्य सम्बंधी रोग, संग्रहणी (दस्त के साथ आंव आना), आंखों के रोग, रतौंधी, प्रमेह (वीर्य विकार), बवासीर तथा पीलिया आदि रोग इसके सेवन करने से ठीक हो जाते हैं।
  •  यह बलगम (कफ) पित्त को कम करता है। 
  • पेट के कीड़े को खत्म करता है तथा खून के प्रवाह को कम करता है। 
  • इसके गोंद का सेवन करने से एसिडिटी दूर हो जाती है। 
  • यह पाचन की शक्ति को बढ़ाता है। इसके पत्ते को सूजन पर लगाने से सूजन कम हो जाती है। 
  • यह भूख को बढ़ाता है, लीवर को मजूबूती प्रदान करता है तथा बलगम को कम करता है।
  • पलाश की जड़ का प्रयोग रतौंधी (रात में दिखाई न देना) को ठीक करने, आंख की सूजन को नष्ट करने तथा आंखों की रोशनी को बढ़ाने के लिए किया जाता है।
  • पलाश (Dhaak /Tesu ) रस में कडुवा, तीखा, कषैला, गुण में छोटा, रूक्ष, गर्म प्रकृति का होता है।
  • इसका फूल-शीतल तथा कफ, वात शामक होता है।
  • यह बवासीर, अतिसार (दस्त), रक्त विकार तथा पेशाब में जलन को दूर करने वाला है ।
  • पलाश मधुमेह, नपुंसकता, गर्भ की रक्षा तथा पीड़ा को दूर करने वाला है ।
  • यह फोड़े-फुंसी और तिल्ली की सूजन में गुणकारी और लाभकारी है।

पलाश के फायदे और उपयोग : Benefits & Uses of Palash in Hindi

1. पेशाब संबंधी :  पलाश के फुल पेशाब संबंधी तकलीफे दूर कर देता है । ढाक के फूल को खौलते हुए पानी में डालकर निकाल लें। इसे गर्म ही नाभि के नीचे बांधने से पेशाब खुलकर आने लगता है।

2. आँख संबंधी :  आँखे  जलते हो 1-2 फुल घोट के पानी में पी लें ।

3. गरमी संबंधी :  तो पलाश के पुष्प का काढ़ा निकाल के पानी में थोडा मिश्री डालके पीने से गरमी भाग जाती है ।

5. गर्भवती को – एक पलाश का फुल पीसकर दूध मिलाके गर्भवती स्त्री को रोज पिलाओ तो बालक को बल भी बढ़ता है, वीर्य भी बढता है, संतान भी सुंदर होती है।और जिसको संतान नहीं वो भी पिये तो उनको संतान होने में मदद मिलती है ।

4. रतोंधी संबंधी : रात को नही देखने की रतोंधी की बिमारी शुरवात वाली उनके भी पलाश के फूलों के रस आँख में डालने से रात को नहीं दीखता है तो दिखने लगेगा ।

5. शरीर को मोटा और शक्तिशाली बनाना :

  • लगभग 50 ग्राम की मात्रा में पलाश के बीज, 25 ग्राम बायविडंग और 200 ग्राम की मात्रा में गुठली वाले आंवले लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इसके बाद रोजाना इस चूर्ण को 3 ग्राम की मात्रा में गाय के दूध के साथ लेने से शरीर की ताकत बढ़ जाती है।
  • शरीर में ताकत बढ़ाने के लिए पलाश (पलाश) के फूलों की कलियों का गुलकन्द बना लें और इस गुलकन्द को 6 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ सेवन करने से शरीर की ताकत बढ़ती है।

6. बच्चे के पेट में कृमी हो तोपलाश के बीज 3 से 6 ग्राम चूर्ण सुबह दूध के साथ 3 दिन तक लें 4 थे दिन सुबह 10 से 15 मि.ली. एरंड का तेल गरम दूध में मिलाकर पिलाने से कृमि सब निकाल जाती है।

7. बच्चों के लिये – पपीते का नास्ता कराने से, पपीते के बीज खिलाने से बच्चे की पेट की तकलीफ ठीक होती है। पलाश के और बेल के सूखे पत्ते और गाय का घी और मिश्री सब मिलाके धूप करने से बुद्धि की शक्ति बहुत बढती है ।आश्रम में धूपबत्ती बनाई जाती है: पलाश के पत्ते, मिश्री, घी, बेल पत्ते से, गोचंदन उससे प्राणायम करने से बच्चों की बुद्धि बढती है ।

8. बवासीर हो तो – बवासीर है तो पलाश के पत्तों की सब्जी, घी और थोडा दही डाल के खाये तो बवासीर ठीक हो जाती है |

9. पेशाब में खून आता हो तो – पलाश की छाल, नाक से अथवा पेशाब से या शोच से खून आता हो तो पलाश के पेड़ की छाल का काढ़ा ५० ग्राम बनाकर उसको पिलाओ ठंडा करके मिश्री मिलाकर तो खून नाक से आता हो, पेशाब की जगह से आता हो, शोच की जगाह से आता हो खून बंद हो जायेगा ।

10. वीर्यवान बनना हो तो – पलाश का गोंद १ ग्राम से ३ ग्राम मिश्री युक्त दूध में घोल के पिलाओ तो वीर्यवान बनेगा, नामर्द भी मर्द बनेगा । कमजोर भी बलवान हो जायेगा ।

11. संग्रहणी हो तो – ये गोंद गरम पानी में घोलकर पीने से संग्रहणी मिट जाती है, दस्त मिट जाती है, आराम मिलता है।

12. कुष्ठरोग हो तो – पलाश के फुल कुष्ठरोग, दाह, वायु संबंधी बीमारी, पित्त, कफ, तृषार, रक्तदोष एवं मृतक्रुष आदि रोगों को भगाने में बड़ा काम करते है ।

13. रक्तसंचार के लिए – पलाश के फुलोंका प्राकृतिक नारंगी रंग रक्तसंचार में और रक्तवृद्धि में काम करता है ।

14. शक्तिवर्धक – मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के साथ–साथ मानसिक शक्ति और इच्छा शक्ति को बढाता है । पलाश का रंग शरीर की सप्तधातुओं और सप्तरंगों में संतुलन स्थापित करता है, त्वचा की सुरक्षा करता है तथा उष्णीय, गरम तापमान रहने की शक्ति देता है | इससे शरीर की गरमी सहन करने की योग्यता, क्षमता बढती है ।और जिनकी क्षमता नहीं वो चिडचिडे हो जाते है, गुस्सेबाज हो जाते है और गरमी संबंधी बिमारियों के शिकार हो जाते है ।जैसे पलाश के फूलों का रंग छिडकना चालु किया तो कालसर्प भी भाग जाता है और सूर्य की तीखी किरणों से भी रक्षा हो जाती है ।

15. बंदगांठ (गांठ) :

  • पलाश के पत्तों की पोटली बांधने से बंदगांठ में लाभ मिलता है।
  • पलाश के जड़ की तीन से पांच ग्राम छाल को दूध के साथ पीने से बंदगांठ में लाभ होता है।

16. पित्तशोथ (पित्त की सूजन) : पलाश के गोंद को पानी में गलाकर प्रतिदिन लेप करने से पित्तशोथ मिट जाती है।

17. अंडकोष की सूजन :

  • पलाश के फूल की पोटली बनाकर नाभि के नीचे बांधने से मूत्राशय (वह स्थान जहां पेशाब एकत्रित होता हैं) के रोग समाप्त हो जाते हैं और अंडकोष की सूजन भी नष्ट हो जाती है।
  • पलाश की छाल को पीसकर लगभग 4 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ सुबह और शाम देने से अंडकोष का बढ़ना खत्म हो जाता है।

18. घाव : पलाश के गोंद का चूर्ण घाव पर छिड़कने से घाव ठीक हो जाता है।

19. दंश : पलाश के बीजों को दूध में घिसकर दंश पर लगाने से वेदना कम होकर आराम मिलता है।

20. दाद : ढाक के बीजों को नींबू के रस के साथ पीसकर दाद और खुजली पर लगाने से ये रोग ठीक हो जाते हैं।

21. नारू (बाला) : पलाश के बीज, कुचला के बीज, कपूर रस, सादा कपूर और गूगल इन सब औषधियों को थोड़ा लेकर महीन पीसकर पानी  के साथ खरल करके फिर एक पीपल के पत्ते पर उनका लेप करके उस पीपल के पत्ते को नारू के फोले के ऊपर बांध देना चाहिए। इस पट्टी को तीन दिन तक बांधने से नारू का कीड़ा जल्दी खत्म हो जाता है और रोग ठीक हो जाता है।

22. श्लीपद (हाथी पांव) : पलाश के जड़ के 100 मिलीलीटर रस को थोड़ा सा सफेद सरसों का तेल मिलाकर 2 चम्मच सुबह-शाम पीने से श्लीपद रोग में लाभ मिलता है।

23. निरोगी और दीर्घायु : पलाश के सूखे हुए पंचांग (जड़, तना, पत्ता, फल और फूल) को छाया में सुखाकर चूर्ण बना लें। इसे शहद एवं घी साथ 1 चम्मच की मात्रा में सुबह और शाम सेवन करने से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाता है।

24. हैजा : पलाश के फल 10 ग्राम तथा कलमी शोरा 10 ग्राम दोनों को पानी में घिसकर या पीसकर लेप बना लें। फिर इसे रोगी के पेडू पर लगाएं। यह लेप रोगी के पेड़ू पर बार-बार लगाने से हैजा रोग ठीक हो जाता है।

25. वाजीकरण (सेक्स पावर) :

  • 5 से 6 बूंद पलाश के जड़ का रस प्रतिदिन 2 बार सेवन करने से अनैच्छिक वीर्यस्राव (शीघ्रपतन) रुक जाता है और काम शक्ति बढ़ती है।
  • पलाश के बीजों के तेल से लिंग की सीवन सुपारी छोड़कर शेष भाग पर मालिश करने से कुछ ही दिनों में हर तरह की नपुंसकता दूर होती है और कामशक्ति में वृद्धि होती है।

26. आंखों के रोग : पलाश की ताजी जड़ का 1 बूंद रस आंखों में डालने से आंख की झांक, खील, फूली मोतियाबिंद तथा रतौंधी आदि प्रकार के आंखों के रोग ठीक हो जाते हैं।

27. नकसीर  (नाक से खून आना) : पलाश के 5 से 7 फूलों को रात भर ठंडे पानी में भिगोएं। सुबह के समय में इस पानी से निकाल दें और पानी को छानकर उसमें थोड़ी सी मिश्री मिलाकर पी लें इससे नकसीर में लाभ मिलता है।

28. मिर्गी : 4 से 5 बूंद पलाश की जड़ों का रस नाक में डालने से मिर्गी का दौरा बंद हो जाता है।

29. गलगण्ड (घेंघा) रोग : पलाश की जड़ को घिसकर कान के नीचे लेप करने से गलगण्ड मिटता है।

30. मंदाग्नि : 4 से 5 बूंद पलाश की ताजा जड़ों का रस नागरबेल के पत्ते में रखकर सेवन करने भूख खुलकर आती है।

31. अफारा (पेट में गैस बनना) : पलाश की छाल और शुंठी का काढ़ा 40 मिलीलीटर की मात्रा सुबह और शाम पीने से अफारा और पेट का दर्द नष्ट हो जाता है।

32. उदरकृमि (पेट के कीड़े) : पलाश के बीज, कबीला, अजवायन, वायविडंग, निसात तथा किरमानी को थोड़े सी मात्रा में मिलाकर बारीक पीसकर रख लें। इसे लगभग 3 ग्राम की मात्रा में गुड़ के साथ देने से पेट में सभी तरह के कीड़े खत्म हो जाते हैं। पलाश के बीजों के चूर्ण को 1 चम्मच की मात्रा में दिन में 2 बार सेवन करने से पेट के सभी कीड़े मरकर बाहर आ जाते हैं।

33. प्रमेह (वीर्य विकार) :

  • पलाश की मुंहमुदी (बिल्कुल नई) कोपलों को छाया में सुखाकर कूट-छानकर गुड़ में मिलाकर लगभग 10 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम खाने से प्रमेह नष्ट हो जाता है।
  • पलाश की जड़ का रस निकालकर उस रस में 3 दिन तक गेहूं के दाने को भिगो दें। उसके बाद दोनों को पीसकर हलवा बनाकर खाने से प्रमेह, शीघ्रपतन (धातु का जल्दी निकल जाना) और कामशक्ति की कमजोरी दूर होती है

34. रक्तार्श (खूनी बवासीर) : पलाश के पंचाग (जड़, तना, पत्ती, फल और फूल) की राख लगभग 15 ग्राम तक गुनगुने घी के साथ सेवन करने से खूनी बवासीर में आराम होता है। इसके कुछ दिन लगातार खाने से  बवासीर के मस्से सूख जाते हैं।

35. अर्श (बवासीर) : बवासीर में पलाश के ताजे पत्तों में घी की छौंका लगाकर दही की मलाई के साथ खाने से बवासीर में लाभ मिलता है।

36. अतिसार (दस्त) :

  • पलाश के गोंद लगभग 650 मिलीग्राम से लेकर 2 ग्राम तक लेकर उसमें थोड़ी दालचीनी और अफीम (चावल के एक दाने के बराबर) मिलाकर खाने से दस्त आना बंद हो जाता है।
  • पलाश के बीजों का क्वाथ (काढ़ा) एक चम्मच, बकरी का दूध 1 चम्मच दोनों को मिलाकर खाने के बाद दिन में 3 बार खाने से अतिसार में लाभ मिलता है।

37. मूत्रकृच्छ (पेशाब करने में कष्ट या जलन) :

  • लगभग 20 ग्राम पलाश के फूल रात भर 200 मिलीलीटर ठंडे पानी में भिगो दें। सुबह के समय में इस पानी में थोड़ी सी मिश्री मिलाकर पीने से गुर्दे का दर्द और मूत्र के साथ खून आना बंद हो जाता है।
  • पलाश के फूलों को पानी में डालकर उबालकर छान लें और इसे गर्म ही पेडू (नाभि) पर रखकर बांध दें इससे रुका हुआ पेशाब, वृक्क शूल और सूजन नष्ट हो जाता है।
  • पलाश की सूखी हुई कोंपले, गोंद, छाल और फूलों को मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में थोड़ी मिश्री मिलाकर लगभग 10 ग्राम की मात्रा प्रतिदिन दूध के साथ शाम को लेने से पेशाब करने पर होने वाले कष्ट दूर हो जाते हैं।

38. सूजन : पलाश के फूल की पोटली बनाकर बांधने से सूजन नष्ट हो जाती है।

39. सन्धिवात (जोड़ों का दर्द) : पलाश के बीजों को बारीक पीसकर शहद के साथ दर्द वाले स्थान पर लेप करने से संधिवात में लाभ मिलता है।

40. दाद :

  • पलाश के बीजों को नींबू के रस में पीसकर बने लेप को 2-3 बार रोजाना लगाने से दाद ठीक हो जाता है।
  • पलाश (पलास) के बीज और कत्था बराबर मात्रा में लेकर पानी के साथ पीसकर दाद पर लगाने से दाद पूरी तरह से ठीक हो जाता है।

41. बिच्छू दंश : पलाश के दूध में बीज को पीसकर दंश पर 2-3 बार लगाने से लाभ मिलता है।

42. दांत का दर्द : पलाश के पत्ते पर खाने का चूना लगाकर और चुटकी भर नौसादर लपेटकर दांतों के बीच दबाकर रखने से दर्द खत्म हो जाता है।

43. व्रण, घाव :

  • घाव होने पर पलाश के सूखे पत्ते की राख को घी में मिलाकर लगाते रहने से घाव भर जाते हैं।
  • बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें, फिर इसे तिल के तेल में मिलाकर इसमें शहद मिलाकर रोजाना सोते समय योनि में नियमित रूप से लगाएं या पलाश की कलियों का सूखा चूर्ण और मिश्री मिलाकर एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम पीने से कुछ ही दिनों में योनि शैथिल्यता (योनि का ढीलापन) दूर हो जाती है।

44. कमजोरी : 20 ग्राम पलाश के बीजों का चूर्ण, 60 ग्राम काले तिल और 120 ग्राम मिश्री मिलाकर पीस लें। फिर 1 चम्मच सुबह-शाम 1 कप दूध के साथ सेवन करने से ‘शरीर की कमजोरी दूर हो जाती है।

45. प्रदर : पलाश के फूल के चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर एक चम्मच सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से प्रदर रोग नष्ट हो जाता है।

46. नपुंसकता : पलाश की जड़ का काढ़ा आधा कप की मात्रा दिन में 2 बार पीने से, बीज का तेल शिश्न पर मुण्ड (सुपारी) छोड़कर मालिश करते रहने से कुछ ही दिनों में नपुंसकता के रोग में लाभ मिलता है।

47. पेशाब लगने पर : पलाश के फूल को खौलते हुए पानी में डालकर निकाल लें। इसे गर्म ही नाभि के नीचे बांधने से पेशाब खुलकर आने लगता है।

48. सिर दर्द : पलाश के बीजों को पानी में पीसकर बने लेप को सिर पर लगाने से सिर दर्द में आराम मिलता है।

49. मिर्गी का दौरा :

  • पलाश के बीज का तेल सुंघाने और जड़ को पानी में घिसकर 2-4 बूंद नाक में डालने से मिर्गी के दौरे में रोगी को तुंरत लाभ मिलता है।
  • मिर्गी का दौरा आते समय पलाश की जड़ को घिसकर रोगी की नाक में टपकाने से रोगी को आराम मिलता है।

50. शीघ्रपतन : पलाश के कोमल पत्तों का चूर्ण गुड़ में मिलाकर गोलियां बनाकर दिन में 3 बार 1-1 गोली सेवन करने से शीघ्रपतन का रोग दूर हो जाता है।

51. शुक्रमेह : पलाश की जड़ की छाल का चूर्ण 1 चम्मच की मात्रा में एक कप दूध के साथ सुबह-शाम पीने से शुक्रमेह का कष्ट दूर होकर कामशक्ति में बढ़ोत्तरी होती है।

52. मलेरिया का बुखार : 10 ग्राम पलाश के बीजों की गिरी और 10 ग्राम करंजवा के बीजों की गिरी को पानी में घिसकर छोटी-छोटी गोलियां बनाकर सूखा लें। मलेरिया के रोगी को ये गोली देने से मलेरिया के बुखार में लाभ होता है।

53. अण्डकोष का बढ़ना : पलाश के फूलों को पानी में डालकर उबाल लें। खौलने पर उतारकर ठण्डा होने दें। इसका धीरे-धीरे से लेप करने से अण्डकोष की सूजन में आराम मिलता है।

54. बालों के रोग : पलाश के पत्ते और छाल को जलाकर छान लें और इसमें हड़ताल पीसकर मिला दें। इसके बाद बालों को साफ करके इसका प्रयोग करें, इससे बालों के रोगों में फायदा होता है।

55. अफारा (पेट में गैस का बनना) : पलाश के पत्तों को पानी में उबालकर पीने से अफारा (पेट में गैस) और पेट के दर्द में आराम मिलता है।

56. डकार के आने पर : लगभग आधा ग्राम से लगभग 1 ग्राम पलाश की गोंद सुबह और शाम सेवन करने से डकार आने में लाभ होता है।

57. कब्ज :

  • पलाश, हरड़, चीनी या सेंधानमक को पानी में मिलाकर पीने से कब्ज में लाभ होता है।
  • पलाश के 20 पत्तों की घुण्डी ताजे पानी में पीसकर रोगी को दें, यदि पेट का दर्द हल्का हो जाये तो एक बार फिर इसी मात्रा में देने से कब्ज के रोग में राहत मिलती है।

58. गर्भधारण : पलाश का एक पत्ता गाय के कच्चे दूध में पीसकर मासिक-धर्म के शुरू होने के दिनों में सुबह के समय लगातार 3 दिनों तक स्त्री को सेवन कराना चाहिए। इसके सेवन से स्त्री गर्भधारण के योग्य हो जाती है।

59. खून की उल्टी : पलाश के ताजे रस में मिश्री मिलाकर पीने से खून की उल्टी होना बंद हो जाती है।

60. गर्भपात रोकना : पलाश के फूल के रंग में रंगे हुए लाल डोरे में एक करंजुआ बांधकर उसे गर्भवती स्त्री की कमर में लपेट देने से गर्भ नहीं गिरता है। यदि गर्भ स्थिति होते ही यह डोरा बांध दिया जाए तथा नौ महीने तक बंधा रहने दिया जाए, साथ ही गर्भपात के कारणों से बचा जाए तो गर्भ गिरने का भय ही नहीं रहता है।

61. दस्त :

  • पलाश की गोंद को लगभग आधा ग्राम से लेकर लगभग 1 ग्राम की मात्रा में पीने से दस्तों में आराम मिलता है।
  • पलाश के गोंद का चूर्ण बना लें। इसे लगभग 2 ग्राम की मात्रा में थोड़ी-सी दालचीनी के साथ लेने से अतिसार यानी दस्त में आराम मिलता है।

62. आमातिसार : लगभग आधा ग्राम से लगभग 1 ग्राम पलाश की गोंद का सेवन करने से आमातिसार (ऑवयुक्त दस्त) के रोग ठीक हो जाते हैं।

63. घाव में कीड़े : पलाश के बीजों को पीसकर घाव पर छिड़क देने से कीडे मर जाते हैं।

64. आमाशय में जलन : पलाश की गोंद लगभग आधा ग्राम से लगभग 1 ग्राम तक सुबह और शाम सेवन करने से आमाशय में जलन लाभ होता है।

65. पित्त ज्वर : पलाश के कोमल पत्तों को नींबू के रस में पीसकर शरीर पर लगाने से गर्मी उतर जाती है।

66. आठवें महीने के गर्भ के विकार : पलाश का पत्ता पानी के साथ पीसकर घोटकर पिलाएं। इसे गर्भशूल नष्ट होकर गर्भ की पुष्टि होती है।

67. पेट के कीड़े :

  • पलाश के बीजों को पीसकर प्राप्त हुए रस को चावल के पानी (धोवन) या छाछ के साथ पीने से पेट के कीड़े नष्ट हो जाते हैं।
  • पलाश के बीजों के रस और छाछ में ‘शहद मिलाकर पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।
  • पलाश के बीजों को पीसकर 3 से लेकर 6 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से पेट के कीड़ों में लाभ होता है।
  • पलाश के बीजों को पीसकर रस निकाल लें, निकले हुए रस को 14 मिलीलीटर से लेकर 28 मिलीलीटर तक की मात्रा में शहद के साथ सुबह और शाम पीने से आंतों के कीड़े नष्ट हो जाते हैं।
  • पलाश के बीजों को लगभग 25 ग्राम की मात्रा में लेकर बारीक पीसकर 100 मिलीलीटर को खुराक के रूप में छाछ के साथ 1 दिन में सुबह और शाम पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।
  • पलाश के बीजों और बायविंडग को बराबर मात्रा में पीसकर बारीक चूर्ण बनाकर 2 ग्राम चूर्ण को 3 ग्राम नींबू के रस में मिलाकर पीने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।
  • पलाश के बीजों का काढ़ा बना लें, इसी काढे में 3 ग्राम की मात्रा में अजवायन का बारीक चूर्ण मिलाकर पीने से पेट के कीड़े मरकर मल के द्वारा बाहर निकल जाते हैं।
  • पलाश के बीजों को बारीक चूर्ण बनाकर गुड़ के साथ सेवन करने से पेट के कीड़े दूर हो जाते हैं।
  • पलाश के बीजों को पानी में भिगोकर रख लें फिर सुखाकर चूर्ण बना लें इस चूर्ण को 3 दिन तक 2 ग्राम की मात्रा में दें, चौथे दिन इसमें एरण्डी का तेल मिलाकर पिलाने से आंतों में मौजूद लम्बे कीड़े मल के साथ बाहर निकल जाते हैं। इसे शहद के साथ देने से कीड़े समाप्त हो जाते हैं।
  • 1 ग्राम पलाश के बीजों के बारीक चूर्ण को खुराक के रूप में दिन में 3 बार गुड़ के साथ देने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।
  • पलाश के पत्तों का रस या बीजों का रस ‘शहद के साथ चाटने से पेट के अन्दर मौजूद कीड़े खत्म हो जाते हैं।
  • पलाश के बीज और अजवायन को बारीक पीसकर सेवन करने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।

68. गुल्म : पलाश के क्षार के पानी के साथ पकाया हुआ घी पीने से स्त्रियों का रक्त (खूनी) गुल्म समाप्त होता है।

69. योनिकन्द (योनि की गांठ) : पलाश, धाय के फूल, जामुन, लज्जालु, मोचरस और राल को एक साथ पीसकर चूर्ण बनाकर रख लें, फिर इसी चूर्ण को योनिकन्द (योनि की गांठ) में लगाने से योनि से आने वाली बदबू और योनिकन्द (योनि की गांठ) रोग समाप्त हो जाती है।

70. मूत्ररोग : पलाश की सूखी कोंपलें, गोंद तथा छाल को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इसमें से 1 चम्मच भर चूर्ण लेकर दूध के साथ खाने से मूत्रकृच्छ (पेशाब में जलन) का रोग ठीक हो जाता है।

71. योनि के रोग:

  • पलाश के फल और गूलर के फल को तिल के तेल (तेल के नीचे बैठी लई) में पीसकर स्त्री की योनि पर लगाने से योनि सख्त हो जाती है।
  • पलाश की छाल और गूलर के फल को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण तैयार कर लेते हैं। फिर शहद व तिल का तेल मिलाकर योनि में लेप करना चाहिए। इससे भी योनि का आकार छोटा होता है।
  • पलाश के केवल एक पत्ते को दूध में पीसकर मिलाकर पीने से स्त्री को ज्यादा ताकतवर लड़का पैदा होता है।

72. टी.बी : पलाश के पत्तों का रस पीने से टी.बी. रोग में लाभ मिलता है।

73. नासूर : 50 ग्राम पलाश के बीजों को पीसकर उसमें 5 ग्राम गुड़ मिलाकर सुबह-शाम रोगी को देने से नासूर भी ठीक हो जाता है।

74. फीलपांव (गजचर्म) : 20 ग्राम पलाश की जड़ लेकर सरसों के तेल में मिलाकर रोजाना सेवन करने से फीलपांव के रोगी को फायदा मिलता है।

75. कण्ठमाला (गले की गांठे) : पलाश की जड़ को घिसकर और पानी में मिलाकर कान के नीचे लेप करने से कण्ठमाला रोग (गले की गांठे) ठीक हो जाती है।

76. नवें महीने के गर्भ सम्बंधी रोग : पलाश के बीज, काकोली और प्रियवासा की जड़ को पीसकर पानी के साथ सेवन करने से नवें महीने में होने वाली गर्भ सम्बन्धी सभी समस्याएं समाप्त होती हैं।

Read the English translation of this article here Palash (Bastard teak): 23 Amazing Uses, Benefits and Side Effects

अस्वीकरण: इस लेख में उपलब्ध जानकारी का उद्देश्य केवल शैक्षिक है और इसे चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं ग्रहण किया जाना चाहिए। कृपया किसी भी जड़ी बूटी, हर्बल उत्पाद या उपचार को आजमाने से पहले एक विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करें।

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