हमारे शरीर के अग्नाशय से इन्सुलिन हार्मोन का स्राव होता है। यह इन्सुलिन हार्मोन ही शरीर में ग्लूकोज की मात्रा को नियन्त्रित करने में सहायक होता है। जब इन्सुलिन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता तब शर्करा का पाचन सुचारू रूप से नही हो पाता और मधुमेह रोग” का जन्म होता है।

इन्सुलिन क्या है ? insulin in hindi

शरीर में भोजन पचाने की जिम्मेदारी “पाचनतंत्र” की होती है। अग्नाशय (पैंक्रियाज) इसी पाचनतंत्र का एक हिस्सा होता है, अग्नाशय में तीन प्रकार की सेल्स होती हैं।
1. अल्फा सेल्स
2. बीटा सेल्स
3. गामा सेल्स
अग्नाशय में मौजूद बीटा सेल्स ही ‘‘इन्सुलिन हार्मोन” का निर्माण करती हैं। अधिक तनाव, अनिद्रा और चिंता की स्थिति में यह बीटा सेल्स मरने लगती हैं और इनके नष्ट होने से इन्सुलिन नहीं बना पाता इसीलिए टेंशन में शुगर का लेवल बहुत तेजी से बढ़ता है। अग्नाशय में लाखों ‘आइलैंड्स” बने होते हैं और प्रत्येक आइलैंड्स में 80 से 100 के करीब बीटा सेल्स होती हैं। ये बीटा हर दस सेकेण्ड में हमारे शरीर में ग्लूकोज की मात्रा को चेक करती रहती हैं। अगर ग्लूकोज की मात्रा ज्यादा हुई तो बीटा सेल्स इन्सुलिन बनाना शुरू कर देती हैं और अगर ग्लूकोज की मात्रा कम हुई तो यह बीटा सेल्स ग्लुकोज बना भी सकती हैं। इस प्रकार बीटा सेल्स शरीर में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित रखती है।

जब हम भोजन करते हैं तो हमारे शरीर में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है। इस समय बीटा सेल्स सक्रिय हो जाती हैं एवं इन्सुलिन हार्मोन का स्राव करना शुरू कर देती हैं। यह सन्तुलिन ग्लूकोज को ग्लाइकोजन में बदल देता है। ग्लाइकोजन शरीर के लिए एनर्जी का कार्य करता है। ग्लाइकोजन रक्त के माध्यम से हमारी मांसपेशियों में पहुँचने लगता है और मांसपेशियाँ ग्लाइकोज को ऊर्जा के रूप में संचित कर लेती हैं। इस प्रकार भोजन से हमारे शरीर को एनर्जी प्राप्त होती हैं। ग्लाइकोजन हमारे लिवर में काफी मात्रा में संचित रहता है, जब शरीर में ग्लूकोज की कमी होती है जैसे जब हम उपवास रखते हैं या कई बार भोजन नहीं कर पाते तो हमारा लिवर उस इकट्टे हुए ग्लाइकोजन को ग्लूकोज में बदल कर मांसपेशियों को ऊर्जा देता रहता है ताकि शरीर अपना कार्य सुचारु रूप से करता रहे।

क्या होता है जब इन्सुलिन नहीं बनता :

मधुमेह के रोगियों में इन्सुलिन सही मात्रा में नहीं बन पाता और यदि बनता भी है तो शरीर उसका उपयोग सही से नहीं कर पाता। मधुमेह का रोगी जब भोजन करता है तो उसके शरीर में ग्लूकोज का लेवल बढ़ जाता है लेकिन बीटा सेल्स पर्याप्त इन्सुलिन नहीं बना पाती और ग्लूकोज पूरी तरह ‘ग्लाइकोजन में परिवर्तित नहीं हो पाता फलस्वरूप काफी सारी शुगर रोगी के रक्त में ही रह जाती हैं। मांसपेशियों में भी जरूरत के अनुसार एनर्जी नहीं पहुँच पाती इसीलिए मधुमेह के रोगी को ज्यादा भूख लगती है। क्योंकि पेट तो भर जाता है लेकिन मांसपेशियाँ भूखी रह जाती हैं, और उनको पर्याप्त एनर्जी नहीं मिल पाती। जब रक्त में बहुत अधिक ग्लूकोज बढ़ने लगता है तो यह रक्त के प्रवाह और अन्य अंगों पर दुष्प्रभाव डालने लगता है। इस अवस्था में हमारा शरीर ग्लूकोज को पेशाब के मार्ग से शरीर के बाहर निकालना शुरू कर देता है।

कृत्रिम इंसुलिन :

जब शरीर में ग्लूकोज बहुत अधिक बढ़ जाता है तो इन्सुलिन का इंजेक्शन लगाया जाता है। इन्सुलिन शरीर में पहुँचते ही अपना कार्य शुरू कर देता है और जल्दी ही ग्लूकोज का लेवल नियंत्रित हो
जाता है।

सबसे पहले इन्सुलिन बैल के अग्नाशय से बनाया गया था जिसे ”वोभाइन इंसुलिन” का नाम दिया गया था। इसके बाद वैज्ञानिकों ने सूअर के अग्नाशय से “पोरसीन इंसुलिन’ बनाना शुरू किया परन्तु इसमें सूअर और बैलों को मारना पड़ता था। आधुनिक समय में डी.एन.ए. रीकोम्बीनेट नामक तकनीक से शुद्धतम “मानव इंसुलिन” बनाया जाता है।इन्सुलिन का सेवन डॉक्टर के परामर्श पर ही करना चाहिए क्योंकि जरुरत से ज्यादा इन्सुलिन लेना आपका ग्लूकोज का लेवल बहुत कम भी कर सकता है जिससे व्यक्ति कोमा में भी आ सकता है।

प्राकृतिक रूप से इन्सुलिन निर्माण के उपाय :

यदि आपको मधुमेह है और इन्सुलिन पूरी तरह से नहीं बन पा रहा है तो
आप कुछ प्राकृतिक तरीकों से इन्सुलिन का उत्पादन बढ़ा सकते हैं।
1. सुबह 30 मिनट जरूर टहलें।
2. कपालभाति करें। |
3. अग्निसार क्रिया करें।
4. भोजन एक साथ अधिक ना खाकर थोड़ा-थोड़ा खाएं।
5. एलोवेरा जूस पियें।
6. करेले के रस का सेवन करें।
7. तनाव बिल्कुल ना लें।

शरीर में इन्सुलिन बनाने का नुस्खा :

2 चम्मच एलोवेरा जैल में दो चुटकी हल्दी पाउडर डालकर चम्मच से एलोवेरा जैल और हल्दी को मिलाकर इसका पेस्ट बना लें। सुबह खाली पेट इस पेस्ट का सेवन करने से शरीर में इन्सुलिन का निर्माण बढ़ जाता है।

प्रतिदिन खाली पेट इसके सेवन से जिन लोगों के शरीर में इन्सुलिन बिल्कुल नहीं बनता उनके शरीर में भी इन्सुलिन का निर्माण होना लगेगा।

यदि आप दवाइयों का सेवन करते हैं तो सावधान हो जाएँ। क्योंकि यह दवाइयाँ बीटा सेल्स को झकझोर कर उनसे जबरदस्ती इन्सुलिन का निर्माण कराती हैं और जब बीटा सेल्स की कार्यक्षमता बेहद कम हो जाती है तो एक समय के बाद दवाइयां भी कार्य करना बंद कर देती हैं। इन्सुलिन से जुड़ी किसी भी दवाई या इंजेक्शन किसी अच्छे डॉक्टर के परामर्श से ही लें ।