आहार से पाएँ गुर्दे (किडनी) का स्वास्थ्य – Kidney ko Swasth Rakhne ke Liye Aahar

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प्रश्न : गुर्दा (kidney) क्या काम करता है ?

जवाब : गुर्दा हमारे शरीर में निम्नलिखित कार्य करता है:

  • व्यर्थ और विषैले पदार्थ, अतिरिक्त नमक और यूरिया को बाहर निकालता है।
  • रक्तचाप (Blood pressure) को नियमित करना : गुर्दा सोडियम और पानी के साथ रक्तचाप को नियमित करता है।
  • लाल रक्त कणों का नियमन करना : यह लाल रक्त कण बढ़ाने वाले हार्मोन बनाता है।
  • एसिड का नियमन : गुर्दा शरीर में रसायनों का स्वस्थ संतुलन बनाए रखता है, जिससे शरीर का संतुलन बना रहता है।

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प्रश्न : गुर्दे की बीमारियों के प्रकार बताएँ।

जवाब :

a) गुर्दे में गंभीर चोटb) गुर्दे की पुरानी बीमारी (Chronic Kidney Disease)
किडनी को अचानक नुकसान होना। वैसे तो यह थोड़े समय के लिए होता है। मगर इलाज न किया जाए तो यह लंबे समय तक रहने वाले रोग में बदल सकता है।कुछ समय बाद गुर्दे की कार्यक्षमता बुरी तरह से प्रभावित होती है।
1) किसी दवा, इनफेक्शन या रेडिओएक्टिव डाई से होनेवाला नुकसान ।1) उच्च रक्तचाप व मधुमेह के कारण रक्तनलिकाओं को नुकसान होता है।
2) मूत्रमार्ग से मूत्र विसर्जन में बाधा होना ।2) glomerulonephritis : रोग के कारण गुर्दे के उत्तकों या रोग प्रतिरोधक तंत्र को हानि होना ।
3) polycystic kidney disease : गुर्दे पर सिस्ट का पैदा होना।
4) reflux nephropathy : गुर्दे में मूत्र के वापसी प्रवाह से होनेवाली हानि ।
5) गुर्दे या मूत्राशय मार्ग की कंजेनिटल असामान्यता।

प्रश्न : गुर्दे की समस्याओं से ग्रस्त रोगियों के लिए अच्छा पोषण महत्व क्यों होता है ?

जवाब : गुर्दे के रोगों के लिए उचित प्रकार से किया जाने वाला पोषण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

  • आपकी पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करता है।
  • आपके गुर्दे पर पड़ने वाले भार को कम करता है ताकि आपका गुर्दा बचे हुए काम को आसानी से पूरा कर सके।
  • भोज्य पदार्थों से तैयार होने वाले व्यर्थ पदार्थ जैसे यूरिया के निर्माण पर रोक लगाता है।
  • जी मिचलाना, खुजली व मुँह में पैदा होने वाले खराब स्वाद इत्यादि लक्षणों को कम करता है।
  • स्वस्थ वजन को बनाए रखता है तथा मांसपेशियों को होने वाली हानि से बचाव करता है।
  • संक्रमण (Infection) से बचाव करता है।
  • आपको रोजमर्रा के कार्य करने की ऊर्जा प्रदान करता है।
  • अगर आपको मधुमेह है तो उच्च रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद करता है।

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प्रश्न : किसी को गुर्दे का कोई रोग है तो क्या उसे अपने आहार में बदलाव लाना चाहिए ?

जवाब : जी हाँ, अपने डॉक्टर और आहार तज्ञ की सलाह के अनुसार आहार में बदलाव लाना बहुत आवश्यक है। गुर्दे के रोग की हर अवस्था को रोगी की दशा के अनुसार ही देखा जाना चाहिए।

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प्रश्न : एक अच्छे पोषण के आधार क्या है ?

जवाब : खान-पान की स्वस्थ आदतों तथा व्यक्तिगत ज़रूरत को ही अच्छे पोषण का आधार माना जाता है। कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन,वसा, सूक्ष्म पोषक तत्वों (micronutrients) व जल ही पोषण का आधार है, जिसे व्यक्ति के जरूरत के हिसाब से संशोधित किया जाना चाहिए।

प्रश्न : गुर्दे में होने वाली पथरी के कारण क्या है ? इस तरह की समस्याओं में क्या आहार लेना चाहिए ?

जवाब : अकसर पानी की कमी से ही गुर्दे में पथरी की शिकायत होती है। जो लोग यूरिक एसिड के असर को कम करने के लिए भरपूर मात्रा में पानी नहीं पीते, उनके गुर्दे में पी एच का स्तर कम हो जाता है और अधिक ऐसिडिक हो जाता है।

अन्य कारण :

  • हाई प्रोटिन लो वसावाले आहार ।
  • गतिविधि में कमी।
  • कई तरह के गुर्दा और मूत्राशय के इनफेक्शन ।

आहार :

  1. तरल पदार्थों का अधिक मात्रा में सेवन करें : प्रतिदिन 3 से 5 लीटर पानी पिएं। सुबह उठने के बाद प्रति घंटा 250/300 लीटर पानी पिएं। आप पानी को सूप या छाछ के रूप में भी ले सकते हैं। आपके भोजन में सूप व छाछ को शामिल करें।
  2. कैल्शियम : दूध व दूध से बने पदार्थ व हरी पत्तेदार सब्जियों में भरपूर मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है। कैल्शियम से जुड़ा कोई भी निर्णय अपने डॉक्टर से पूछकर ही लें। पुरुषों को प्रतिदिन 800 मिलीग्राम, स्त्रियों को प्रतिदिन 1000 मिली ग्राम तथा मेनोपॉज के बाद प्रतिदिन 1200 मिली ग्राम कैल्शियम लेना चाहिए। डॉक्टर से पूछे बिना ओटीसी सप्लीमेंट न लें।
  3. ऑक्सलेट : कैल्शियम आँतों में ऑक्सालेट के साथ जमा होता है। दिन में इसकी 50 मिली ग्राम से अधिक मात्रा न लें, जैसे – हरी पत्तेदार सब्जियाँ, स्ट्रॉबेरी, चॉकलेट, नट्स व चाय।
  4. चीनी, नमक व पशु प्रोटीन इनमें से किसी के भी अधिक मात्रा में सेवन करने से कैल्शियम या ऑक्सालेट पथरी का जमाव होता है।

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प्रश्न : किसी व्यक्ति को पोषण संबंधित सप्लीमेंट लेना चाहिए या नहीं ?

जवाब : मौजूदा आहार तथा मेडिकल शिकायत के आधार पर व्यक्ति के आहार का विश्लेषण किया जाना चाहिए। आहार के साथ अगर जरूरत हो तो पोषण संबंधित सप्लीमेंट लेनी होंगी। पोषण संबंधित सप्लीमेंट के जरूरत के बारे में आहार तज्ञ सलाह दे सकते हैं। इन्हें डॉक्टर की सलाह के बाद ही लेना चाहिए।

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प्रश्न : क्या व्यक्ति को अन्य पोषक तत्वों को भी नियंत्रित करना चाहिए ?

जवाब : पानी के साथ सोडियम, प्रोटीन व पोटैशियम ग्रहण करने की मात्रा को भी नियंत्रित करना चाहिए और उसे व्यक्ति की मेडिकल स्थिति तथा आहार संबंधी प्रमाण के आधार पर मापा जाना चाहिए । मधुमेहियों को इन्सुलिन की खुराक के आधार पर कार्बोहाइड्रेट का ध्यान रखना चाहिए।

प्रश्न : गुर्दे की समस्याओं के लिए आहार का नियोजन कैसे तैयार करना चाहिए?

जवाब : प्रोटीन की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए आहार प्रमाणानुसार लेना चाहिए। दूध और दालों के प्रमाण को ध्यान में रखते हुए सेवन करें। सब्जियां किस तरह से सेवन करनी चाहिए, इसकी जानकारी रोगी को देनी चाहिए। कम पोटेशियम युक्त फलों को टालें। पानी और नमक का प्रमाण नियंत्रित करना चाहिए । प्रतिदिन व्यक्ति अनुसार आहार के प्रमाण से गुर्दे को ठीक से नियंत्रित रख सकते हैं।
संतुलित आहार भविष्य में बढ़नेवाले रोगों को टालने में मदद कर सकता है और कुपोषण को रोकता है।

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