Jo Jagat Hai So Pavat Hai
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यह पुस्तक जो जागत है सो पावत है नाम से प्रकाशित हुई है और यह प्रातः समरणीय पूज्यपाद संत श्री आसारामजी महाराज के सत्संग-प्रवचन पर आधारित है। आवरण-पृष्ठ पर पीछे चित्रों में माता-पिता, शास्त्र एवं पुत्रकांति का आदर करने वाला पहला सत्य और अध्यात्मिक वस्तु के रूप में विरह विद्वान, विचारकोत्सुक की चित्रकारी मूर्ति, भगवान शंकराचार्य, भगवान कबीर, श्रीरामदेव जी तथा जानकी जी और अन्य दिव्य पात्रों के चित्र दिए गए हैं। अनुक्रम-पृष्ठ पर दूसरे प्रकरण के रूप में पूज्य बापू का ज्योतिमय सन्देश दिया गया है। पैमाना लगभग 15 पृष्ठ का है।
पृष्ठ पर विश्वजी के कथन का उल्लेख है कि जिस किसी को अज्ञान का भोग कर हुए प्रकाशनार्थ्य देते रहते हैं वह आत्मज्ञान नहीं मिला तो अंत में इस जीवात्मा का सर्वस्व नष्ट हो जाता है, और तुलसीदास जी का वह पद भी दिया गया है कि जिन्होंने सत्संग नहीं सुना, हिरकथा नहीं सुनी, उनके कान साँप के बिल के बराबर हैं।
पृष्ठ पर यह भी दर्ज है कि भगवान राम ने बाल्यकाल से संध्या, पूजा, ध्यान आदि किया था और सोलह साल की आयु में तीर्थयात्रा करने निकल गये थे, और साथ में आत्मज्ञान पाना ज़रूरी है, गुरु के वचनों का साक्षात्कार करना ज़रूरी है, तथा एकलाग्य गुरु की मूर्ति बनाकर अभ्यास में लग जाने वाले साधक की महिमा भी बताई गई है। यह पुस्तक सत्संग-पाठकों के लिए उपयोगी है, और गुरु-वाणी का सार उपलब्ध कराती है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- आध्यात्मिक विचार तथा सत्य
- जगत् तथा आत्मा का स्वरूप
- साधना तथा उपदेश
- जीवन-मार्गदर्शन
पुस्तक की मुख्य बातें
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