Sanskar Darshan
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यह पुस्तक संस्कार दर्शन नाम से प्रकाशित हुई है, जो परम पूज्य संत श्री आसारामजी बापू द्वारा प्रेरित है। आवरण-पृष्ठ पर सूर्यास्त के समय सरसों के खेत में बैठे संत का चित्र बना है, और साथ में शीर्षक संस्कार दर्शन तथा एक पंक्ति दी गई है — कठिनों मेले वनके पुत्रा, संस्कार वाले जीवन का सुख। पैमाना लगभग 30 पृष्ठ का है।
पृष्ठ पर बताया गया है कि वाल संस्कार केन्द्र के माध्यम से विद्यार्थिकाल जीवन की नीव है और आज उसी से ईंसा सुख बनाया जा सकता है, तथा साथ में इमनाटर उड़ेस्ट और मंगल उत्थान ट्रस्ट, संत श्री आसारामजी बापू आश्रम नगर, अहमदाबाद-५ का पता तथा ई-मेल और वेबसाइट भी दिया गया है।
पुस्तक में प्रार्थना और सद्गुरु-महिमा जैसे दो भाग दिए गए हैं, जिनमें भगवान शिव और सद्गुरु के साथ साधक के सम्बन्ध का वर्णन तथा सद्गुरु के चेहरे से दूर से मिल जाने जैसी पंक्तियाँ दी गई हैं, साथ में शास्त्र-वचनामृत और संत-वचनामृत के हवाले भी आए हैं। यह पुस्तक वाल संस्कार केन्द्र की कक्षा-सामग्री के रूप में उपयोगी है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- संस्कार तथा मूल्य
- चरित्र तथा व्यवहार
- परिवार तथा समाज
- मार्गदर्शन
पुस्तक की मुख्य बातें
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