Swami Rama Tirtha Granthavali – 11
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यह पुस्तक श्री रामतीर्थ ग्रन्थावली का खण्ड तीसरा है, जिसमें स्वामी रामतीर्थ का सदुदेश-भाग ११ दिया गया है। पैमाना लगभग 128 पृष्ठ का है।
शीर्षक-पृष्ठ पर प्रकाशक श्री रामतीर्थ पब्लिकेशन लीग, लखनऊ बताया गया है, साथ में प्रथम संस्करण प्रति दो हजार, अक्तूबर १९२१ और आश्विन १९७८ की तारीखें तथा मूल्य डाक व्यय रहित, बिना जिल्द अथवा सजिल्ट्ट फुटकर संस्करण का उल्लेख भी है।इस भाग में स्वामी रामतीर्थ के सदुदेश का ग्यारहवाँ भाग दिया गया है, जिसमें उनके जीवन-चरित्र और वेदान्त-सम्बन्धी विचारों का संकलन मिलता है, तथा छपाई के विवरण से यह पता चलता है कि पुस्तक लखनऊ से छपी थी। विषय-सूची में पृष्ठ-अंक दिए गए हैं।
अगला पृष्ठ विषय-सूची है, जिसमें जीवन चरित्र, विज्ञानियों आद्यात्मिक शोक और लोगों को वेदान्त क्यों नहीं मानता जैसे प्रकरण पृष्ठ-संख्याओं के साथ दिए गए हैं, और उसके नीचे छपाई का विवरण अंग्रेज़ी में दिया गया है, जिसमें लिखा है कि छपाई K. C. Banerjee ने Anglo-Oriental Press, Lucknow से की गई।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- स्वामी रामतीर्थ की रचनाएँ (भाग 11)
- प्रवचन तथा कविता
- अद्वैत तथा भक्ति
- प्रेरक विचार
पुस्तक की मुख्य बातें
डाउनलोड कैसे करें — बस 3 कदम
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