Swami Rama Tirtha Granthavali – 12
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यह पुस्तक स्वामी रामतीर्थ, उनके सदुदेश-भाग १२ नाम से प्रकाशित हुई है, जिसे श्री रामतीर्थ ग्रन्थावली का खण्ड चौथा और वर्ष दूसरा बताया गया है। पैमाना लगभग 130 पृष्ठ का है।
शीर्षक-पृष्ठ पर प्रकाशक श्री रामतीर्थ पण्डितकेशन लीग, लखनऊ अंकित है, साथ में प्रथम संस्करण प्रति दो हजार, नवम्बर १९२१ तथा कार्तिक १९४८ की तारीखें और मूल्य प्रति कापी डाक व्यय सहित का उल्लेख भी है। विना जिल्द अथवा सजिल्ट्ट कुठक्कर की जानकारी दी गई है।इसके अतिरिक्त कुछ प्रश्नोत्तर भी दिए गए हैं, जिनमें साधना-मार्ग की व्यावहारिक कठिनाइयों पर प्रकाश डाला गया है।
अगला पृष्ठ विषयानुक्रम है, जिसमें वार्षिक रिपोर्ट, सुलछ कि जैसे और गंगा वर्षेग जैसे प्रकरण पृष्ठ-संख्याओं के साथ दिए गए हैं, और विषयानुक्रम में दर्शाए गए प्रकरणों में उनके वार्षिक प्रवचन का सार और कुछ प्रश्नोत्तर भी रखे गए हैं, जो पाठक को विषय को क्रम से समझने में मदद करते हैं। इस भाग में उनकी साधना-यात्रा के विवरण भी सहज शैली में प्रस्तुत किए गए हैं।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- स्वामी रामतीर्थ की रचनाएँ (भाग 12)
- प्रवचन तथा कविता
- अद्वैत तथा भक्ति
- प्रेरक विचार
पुस्तक की मुख्य बातें
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