Swami Rama Tirtha Granthavali – 13
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यह पुस्तक श्री रामतीर्थ ग्रन्थावली का खण्ड पहिला है, जिसमें स्वामी रामतीर्थ का सदुदेश-भाग १३ दिया गया है। पैमाना लगभग 163 पृष्ठ का है।
शीर्षक-पृष्ठ पर प्रकाशक श्री रामतीर्थ पब्लिकेशन लीग, लखनऊ अंकित है, साथ में प्रथम संस्करण प्रति दो हजार, जनवरी १९२३ और माघ १९७९ की तारीखें तथा मूल्य डाक व्यय रहित, सजिल्द अथवा विशेष संस्करण का उल्लेख भी है।इस भाग में स्वामी रामतीर्थ के सदुदेश का तेरहवाँ भाग दिया गया है, जिसमें गंगा-तरंग, ज्ञानानंद तथा राम-परिचय जैसे प्रकरणों का वर्णन मिलता है, और छपाई का विवरण अंग्रेज़ी में दिया गया है, जिससे छपने के स्थान और वर्ष की जानकारी मिलती है। विषय-सूची में पृष्ठ-अंक दिए गए हैं।
अगला पृष्ठ विषय-सूची है, जिसमें खुद्द कि जेब गंगा-तरंग, ज्ञानानंद तथा राम परिचय जैसे प्रकरण पृष्ठ-संख्याओं के साथ दिए गए हैं, और नीचे छपाई का विवरण अंग्रेज़ी में दिया गया है, जिसमें लिखा है कि छपाई Ram Shanker Bajpi ने Lucknow Steam Printing Press, Lucknow से की गई, वर्ष १९२२।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- स्वामी रामतीर्थ की रचनाएँ (भाग 13)
- प्रवचन तथा कविता
- अद्वैत तथा भक्ति
- प्रेरक विचार
पुस्तक की मुख्य बातें
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