Swami Rama Tirtha Granthavali – 15
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यह पुस्तक श्री रामतीर्थ ग्रन्थावली का खण्ड तीसरा है, जिसमें स्वामी रामतीर्थ का सदुदेश-भाग १५ दिया गया है। पैमाना लगभग 162 पृष्ठ का है।
शीर्षक-पृष्ठ पर प्रकाशक श्री रामतीर्थ पब्लिकेशन लीग, लखनऊ अंकित है, साथ में प्रथम संस्करण प्रति दो हजार, मई १९२२ और ज्येष्ठ १९७८ की तारीखें तथा मूल्य फुटकर कापी, जिल्द, डाक व्यय रहित अथवा सजिल्ट्ट संस्करण का उल्लेख भी है।इस भाग में स्वामी रामतीर्थ के सदुदेश का पंद्रहवाँ भाग दिया गया है, जिसमें उनके विचारों का संकलन मिलता है, और छपाई के विवरण से यह भी स्पष्ट होता है कि पुस्तक लखनऊ से छपी थी। संचलक का नाम भी स्पष्ट रूप से अंकित है।
अगला पृष्ठ मुख्य समाचार का है, जिसमें बताया गया है कि पहिया कागज का दाम कुछ घट जाने से संस्करण वाली जिल्द का वार्षिक शुल्क पहले के स्थान पर घटाकर लिया गया है, और यह सबों के हित में बताया गया है। संचलक के रूप में श्री रामतीर्थ पब्लिकेशन लीग दिया गया है और नीचे छपाई का विवरण अंग्रेज़ी में मिलता है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- स्वामी रामतीर्थ की रचनाएँ (भाग 15)
- प्रवचन तथा कविता
- अद्वैत तथा भक्ति
- प्रेरक विचार
पुस्तक की मुख्य बातें
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