Swami Rama Tirtha Granthavali – 17,18
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यह पुस्तक राम-पत्र भाग १, २, ३ नाम से प्रकाशित हुई है, जिसमें स्वामी रामतीर्थ के सदुदेश-भाग १७ और १८ दिए गए हैं और इसे श्री रामतीर्थ ग्रन्थावली के खण्ड ५ व ६ का हिस्सा बताया गया है। पैमाना लगभग 327 पृष्ठ का है।
शीर्षक-पृष्ठ पर प्रकाशक श्री रामतीर्थ पण्डितकेशन लीग, लखनऊ दिया गया है, साथ में नवम्बर १९२३ और फरवरी १९४९ की तारीखें, मूल्य कुठक्कर कापी तथा विशेष संस्करण ३ रुपये का उल्लेख मिलता है। अगले पृष्ठ पर छपाई का विवरण अंग्रेज़ी में दिया गया है, जिसमें लिखा है कि छपाई K. C. Banerjee ने Anglo-Oriental Press, Lucknow से की गई, वर्ष १९२२।
पृष्ठ पर यह भी बताया गया है कि धर्मस्थान वाले ब्राह्मणों के पंजरटी के लिये तथा वीरों के निस्सर्ग विरहित, दर क्रमशः की विशेष हिन्दी व्याख्या दी गई है। इस संकलन में स्वामी रामतीर्थ के राम-पत्र के अनुवाद रूप में भक्ति और दार्शनिक विचारों का वर्णन है, और इसमें मूल राम-पत्र के पाठ के साथ हिन्दी व्याख्या और टीका भी दी गई है, जिससे भावार्थ को स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- स्वामी रामतीर्थ की रचनाएँ (भाग 17-18)
- प्रवचन तथा कविता
- अद्वैत तथा भक्ति
- प्रेरक विचार
पुस्तक की मुख्य बातें
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