Swami Rama Tirtha Granthavali – 20
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यह पुस्तक श्री रामतीर्थ ग्रन्थावली का खण्ड दूसरा है, जिसमें स्वामी रामतीर्थ का सदुदेश-भाग २० दिया गया है। पैमाना लगभग 162 पृष्ठ का है।
शीर्षक-पृष्ठ पर प्रकाशक श्री रामतीर्थ पब्लिकेशन लीग, लखनऊ बताया गया है, साथ में प्रथम संस्करण प्रति दो हजार, जून १९२३ और जेष्ट्ठशुक्र १९५० की तारीखें तथा फुटकर विना जिल्द, डाक व्यय रहित अथवा सजिल्ट्ट संस्करण का उल्लेख भी है।इस भाग में स्वामी रामतीर्थ के सदुदेश का बीसवाँ भाग दिया गया है, जिसमें उनके आत्मज्ञान-सम्बन्धी अनुभवों का वर्णन और अनेक प्रश्नोत्तर रूपी प्रकरण मिलते हैं, जो पाठक को विषय को क्रम से समझने में मदद करते हैं, और स्वयं लिखे गए होने के कारण इन पृष्ठों की भाषा सीधी और अनुभव-आधारित है।
अगला पृष्ठ विषय-सूची है, जिसमें भैती इच्छा पूर्ण हो रही है, प्रणाल प्रभाव व आत्म-संसारात्कार आरम्भोत्सव का मार्ग, प्रभु और उत्तर, क्या समाज विशेष की आवश्यकता है और आरम्भोत्सव के मार्ग में कुछ वाधाएँ जैसे प्रकरण पृष्ठ-संख्याओं के साथ दिए गए हैं।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- स्वामी रामतीर्थ की रचनाएँ (भाग 20)
- प्रवचन तथा कविता
- अद्वैत तथा भक्ति
- प्रेरक विचार
पुस्तक की मुख्य बातें
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