Swami Rama Tirtha Granthavali – 21
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यह पुस्तक श्री रामतीर्थ ग्रन्थावली का खण्ड तीसरा है, जिसमें स्वामी रामतीर्थ का सदुदेश-भाग २१ दिया गया है। पैमाना लगभग 162 पृष्ठ का है और आवरण पर ॐ के नीचे भाग इक्कीसवाँ तथा परमहंस स्वामी रामतीर्थ का चित्र बना है।
शीर्षक-पृष्ठ पर प्रकाशक श्री रामतीर्थ पब्लिकेशन लीग, लखनऊ अंकित है, साथ में प्रथम संस्करण प्रति दो हजार, जून १९२२ और जेष्ट्ठशुक्र १९५० की तारीखें तथा फुटकर बिना जिल्द, डाक व्यय रहित अथवा सजिल्ट्ट संस्करण का उल्लेख भी है।इस भाग में स्वामी रामतीर्थ के सदुदेश का इक्कीसवाँ भाग दिया गया है, जिसमें उनके आत्मज्ञान-सम्बन्धी अनुभवों का संकलन तथा अनेक प्रश्नोत्तर रूपी प्रकरण मिलते हैं, और स्वयं लिखे गए होने के कारण इन पृष्ठों की भाषा सीधी तथा अनुभव-आधारित है।
इस भाग में स्वामी रामतीर्थ के सदुदेश का इक्कीसवाँ भाग दिया गया है, जिसमें उनके आत्मज्ञान-सम्बन्धी अनुभवों का संकलन तथा अनेक प्रश्नोत्तर रूपी प्रकरण मिलते हैं, जो पाठक को विषय को क्रम से समझने में मदद करते हैं।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- स्वामी रामतीर्थ की रचनाएँ (भाग 21)
- प्रवचन तथा कविता
- अद्वैत तथा भक्ति
- प्रेरक विचार
पुस्तक की मुख्य बातें
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