योग चिकित्सा के स्वास्थ्य लाभ – Yog Chikitsa ke Labh in Hindi

स्वस्थ व सुखी जीवन मनुष्य की प्रथम आवश्यकता है। सिर्फ शारीरिक ही नहीं मानसिक व आत्मिक स्वास्थ्य भी ज़रूरी है क्योंकि रोग का कारण सिर्फ शरीर ही नहीं मन भी होता है। इसलिए मनुष्य को शरीर के साथ मानसिक व आत्मिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना ज़रूरी है। भारतीय दर्शन में योग दर्शन एक विशेष स्थान रखता है। प्राचीन काल से ही योग भारतीय संस्कृति व साधना का अभिन्न अंग रहा है। योग भारतीय ऋषि मुनियों की विशेष देन है। आत्मा को परमात्मा से मिलाना ही योग है।

योग चिकित्सा के सिद्धांत (Yoga Therapy in Hindi)

महर्षि पतंजली ने अष्टांग योग के बारे में विस्तृत ज्ञान दिया है। उनका कहना है, हमें सीधे योगाभ्यास पर नहीं जाना है, पहले अष्टांग योग को देखना है व उसका पालन करते हुए योगाभ्यास करना है। उनके अष्टांग नियम है – यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान व समाधि। इन सभी को साथ लेकर चलेंगे तभी योगासन व व्यायाम का पूरा लाभ मिलेगा व हम पूर्ण स्वस्थ रह सकते हैं। स्वस्थ व्यक्ति को योगाभ्यास क्यों करना चाहिए ?

हम देखते हैं कि रोगी व्यक्ति को हमेशा सभी कहते हैं, दवाइयों के साथ आसन ज़रूर करे। लेकिन यदि हम पूर्ण स्वस्थ हैं तो भी हमें आसन ज़रूर करने चाहिए। स्वस्थ रहने के लिए खान
पान, नियमित दिनचर्या, संयम का क्रम जितना आवश्यक है उसी तरह शरीर के सभी अंगों को सक्रिय व जीवंत बनाना भी ज़रूरी है।

शरीर एक फैक्ट्री जैसा है, जहाँ पर उपयोगी तत्त्व बनते हैं, साथ ही विकार (विष) भी उत्पन्न होते हैं। उन्हें निकालना ज़रूरी है। शरीर के अंदर तोड़फोड़ भी चलती रहती है। पुरानी कोशिकाएँ समाप्त होती है, नई बनती रहती हैं। इन सभी के लिए व्यक्ति को उपयुक्त व्यवस्था बनानी ज़रूरी है। उसके लिए नियमित, संतुलित योगाभ्यास ज़रूर करना चाहिए, जिससे हम बीमारियों के शिकार न हों। आज के युग में व्यायाम के कई प्रकार हैं जैसे- झुंबा, जिम जाना, स्वीमिंग करना, अखाड़े में जाना या अन्य और भी कई महंगे साधन हैं, जो प्रत्येक सामान्य व्यक्ति नहीं कर सकता है। इसके लिए सभी सामान्य व्यक्ति को चलना, दौड़ना या योगाभ्यास करना चाहिए। इसमें किसी तरह का खर्चा नहीं है सिर्फ समय निकालना है।

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योग चिकित्सा का महत्व और लाभ (Yog Chikitsa ke Labh in Hindi)

स्वस्थ व्यक्ति को योगाभ्यास क्यों करना चाहिए या इसे करने से व्यक्ति के शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है।

1). स्नायु – योग द्वारा हमारे सूक्ष्म स्नायु चुस्त होते हैं, जिससे रक्त का संचार सही होता है व शरीर रोग मुक्त रहता है।

2). डिप्रेशन – स्वस्थ व्यक्ति नियमित रूप से योगासन करता रहे तो शरीर की सभी ग्रंथियाँ प्रभावित होती हैं, जिससे हार्मोन्स का प्रवाह व्यवस्थित मात्रा में होता है। व्यक्ति के विचार बदल जाते हैं, वह खुश रहता है। उसमें हिंसक, क्रोध या आक्रमक विचार नहीं आते। हीन भावना नहीं आती, डिप्रेशन में नहीं जाता। अर्थात योगाभ्यास से व्यक्ति का सर्वोपरि विकास होता है।

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3). निर्णय शक्ति – व्यक्ति के विवेक (ज्ञान) व संवेग में निरंतर संघर्ष चलता रहता है। विवेक गलत कार्य करने से रोकता है जबकि संवेग कार्य करवा लेता है, चाहे वह गलत हो। योगाभ्यास के द्वारा रीढ़ व मस्तिष्क विशेष रूप से प्रभावित होते रहते हैं, जिससे व्यक्ति की निर्णय शक्ति बढ़ती है, व्यक्ति सही कार्य करता है।

4). मधुमेह – आसन व प्राणायाम करने से पैनक्रियाज़ एक्टिव रहता है। इन्शुलिन ठीक मात्रा में बनता है, जिससे स्वस्थ व्यक्ति को कभी भी डायबिटीज नहीं होता है।

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5). पाचन तंत्र – योगाभ्यास से पाचन तंत्र सही रहता है। शरीर स्वस्थ, हलका व स्फूर्तिदायक रहता है। साथ ही हृदय रोग जैसे बीमारी से व्यक्ति दूर रहता है।

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6). फेफड़े – स्वस्थ व्यक्ति योगासन व प्राणायाम हमेशा करता है तो उसे कभी भी दमा, श्वास की तकलीफ, एलर्जी नहीं होगी क्योंकि योगासन से फेफड़ों में पूर्ण रूप से स्वस्थ हवा प्रवेश करती है, जिससे फेफड़े स्वस्थ्य रहते हैं। व्यक्ति निरोगी रहता है।

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7). मोटापा – योगाभ्यास व साथ ही खान-पान पर थोड़ा ध्यान देने पर शरीर की चरबी कम होती है। शरीर स्वस्थ, सुडौल, सुंदर व लचीला बनता है।

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8). हड्डियाँ – हड्डियों में कैल्शियम बराबर मात्रा में जाता है। इससे हड्डियों की बीमारियाँ नहीं होती।

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9). नाड़ी – यौगिक आसनों से स्नायु शक्ति बढ़ती है, जिससे नाड़ी शक्ति भी बढ़ती है। शरीर रूई की तरह हलका व स्फूर्तिवान बनता है। मन शांत हो जाता है।

10). याददाश्त – स्वस्थ विद्यार्थियों के लिए योगाभ्यास बहुत ही ज़रूरी है। इसे करने से याददाश्त बढ़ती है क्योंकि सर्वांगासन से नर्वस सिस्टम मज़बूत होता है। दिमाग तक खून पहुंचता है व याददाश्त शक्ति बढ़ती है। थकान दूर होती है, कमरदर्द दूर होता है। विद्यार्थियों को योगाभ्यास ज़रूर करना चाहिए। इसके कई लाभ हैं।

11). सौंदर्य – स्वस्थ स्त्रियाँ या लड़कियों को भी योगाभ्यास करना चाहिए, जिससे उनका वज़न सही रहेगा व सुंदर दिखेंगी। गर्भाशय की कोई बीमारी नहीं होगी। त्वचा चमकदार बनती है। कम उम्र की लड़कियों को माहवारी के समय कोई तकलीफ नहीं होती है। यदि वे हमेशा योगाभ्यास करें तो उन्हें बहुत लाभदायक होता है।

अंत में यही कहेंगे कि स्वस्थ्य व्यक्ति को समय निकालकर नियमित रूप से योगाभ्यास व प्राणायाम ज़रूर करना चाहिए, जिससे वह पूर्ण रूप से स्वस्थ रहे।

योगाभ्यास के कुछ नियम :

स्वस्थ व्यक्ति जब योगा या आसन करना प्रारंभ करता है तो उसे पहले कुछ नियमों का पालन करना ज़रूरी होता है, जिससे उसे पूरा लाभ मिले व योगाभ्यास से शरीर को किसी तरह की तकलीफ या नुकसान न हो।

1). आसन प्रातःकाल व शाम को दोनों समय कर सकते हैं। प्रातःकाल का समय सर्वश्रेष्ठ है। प्रातःकाल शौचादि से निवृत्त होकर खाली पेट करना होता है। यदि सुबह समय नहीं है तो शाम को खाना खाने के 4-5 घंटे के बाद भी अभ्यास कर सकते हैं।

2). प्रथम बार योगाभ्यास प्रारंभ करनेवाले नए अभ्यासियों को शरीर विज्ञान का थोड़ा बहुत ज्ञान होना चाहिए। शरीर का कौन सा अंग कहाँ है, कौन-कौन सी ग्रंथियाँ हैं, वह कहाँ पर शरीर में स्थित है, हमें कहाँ दबाव ज़्यादा डालना व कहाँ कम डालना है। इसके लिए अपने योगा शिक्षक से इस बारे में पूरा ज्ञान प्राप्त करें, जिससे योगा का पूरा लाभ मिले।

3). जहाँ आप आसन कर रहे हैं वह स्थान स्वच्छ, शांत व एकांत होना चाहिए। यदि घर में करते हैं तो घी का दीपक या धूप आदि जलाकर उस स्थान को सुगंधित करें।

4). आसन करते समय शरीर पर वस्त्र सुविधाजनक हो ।

5). ज़मीन पर बिछाने के लिए मुलायम दरी या कंबल हो या आज-कल तैयार मैट मिलते हैं। उसका प्रयोग कर सकते हैं। खुली ज़मीन पर कभी भी आसन न करें।

6). आयु, शारीरिक शक्ति व क्षमता का पूरा ध्यान रखें। आसन आराम से करें। जल्दबाजी न करे। थकान लगने पर बीच में आराम करें या शवासन करें या मकरासन करें।

7). 10 वर्ष से अधिक आयुवाले बालक योगाभ्यास कर सकते हैं। गर्भवती महिलाएँ शिक्षक की देखरेख में ही आसन करें। वृद्ध व दुर्बल व्यक्ति आसन व प्राणायाम कम मात्रा में करें।

8). जिन व्यक्तियों के कान से पस बहता है, नेत्र में लाली रहती है, हृदय कमज़ोर होता है उन्हें शीर्षासन या सर्वांगासन नहीं करना चाहिए। उच्च रक्तचापवाले व्यक्ति को सिर के बल किए जानेवाले आसन नहीं करने चाहिए। माहवारी के समय स्त्रियों को आसन नहीं करने चाहिए। कमर दर्द, गरदन दर्द वाले व्यक्तियों को झुकनेवाले आसन नहीं करने चाहिए।

9). योगा करने के आधा घंटे बाद ही भोजन करना चाहिए। आसन के बाद चाय कभी भी न पिएँ। 15 मिनट के बाद नाश्ता कर सकते हैं।

10). योगाभ्यास के समय श्वास लंबा व धीमा लेना है। योगा करते समय जब शरीर आगे की तरफ झुकता है तब श्वास को बाहर निकालना है और जब हम सीधे खड़े होते हैं या पीछे की तरफ झुकते हैं तब श्वास लेना है। श्वास हमेशा नासिका से ही लेना है, मुँह से नहीं लेना है। नाक से श्वास फिल्टर होकर शरीर में जाता है।

11). आँखें बंद करके योगाभ्यास करना चाहिए, जिससे मानसिक तनाव, विचार, चंचलता दूर होते हैं। आप चाहें तो आँखें खोलकर भी अभ्यास कर सकते हैं।

12). आसनों का एक नियम है यदि आप बाएँ करवट कोई आसन करते हैं तो दाई करवट भी वह आसन ज़रूर करें। कुछ आसन ऐसे हैं जिनका विपरीत आसन होता है, उसे ज़रूर करें जैसे- सर्वांगासन के बाद मत्स्यासन, मंडुकासन के बाद उष्ट्रासन, पादहस्तासन के बाद पीछे झुकनेवाला आसन ज़रूर करें। इस तरह से शलभासन, सेतुबंधासन आदि के बाद भी विरोधी आसन ज़रूर करें।

13). नए अभ्यासी को ज़रूर ध्यान रखना है कि पहले 2-4 दिन मांसपेशियों और संधियों में दर्द रहता है। बाद में दर्द ठीक हो जाता है। घबराने की ज़रूरत नहीं है।

14). योगाभ्यास के बाद हमेशा बाईं करवट लेकर धीरे से उठना है। आसनों के अंत में 5-10मिनट शवासन ज़रूर करें। बाद में अपने दैनिक कार्य प्रारंभ करें। खास कर स्त्रियों के लिए यह नियम है, जिन्हें सुबह-सुबह बहुत काम होते हैं।

15). सुबह-सुबह पेट साफ होना बहुत ज़रूरी है। सुबह पेट साफ होने के बाद ही योगाभ्यास करें। यदि पेट साफ ना हो और आप आसन करते हैं दूसरी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

16). योगाभ्यास के समय पसीना आता है तो उसे तौलिए से पोछ लें। इससे चुस्ती आती है, त्वचा स्वस्थ रहती है। शरीर से विषैले पदार्थ बाहर आते हैं। अभ्यास के 10-15 मिनट बाद ही स्नान करें। पहले स्नान करके भी अभ्यास कर सकते हैं।

17). प्रारंभ में सरल आसन ही करें। धीरे-धीरे कठिन आसन को करना प्रारंभ करें। कम समय में अधिक आसन करने के बजाय समय की मात्रा बढ़ाएँ। प्रारंभ में योग प्रशिक्षक की देखरेख में आसनों को करें।

18). स्वस्थ व नए व्यक्ति को अपने शरीर की क्षमता के अनुसार व्यायाम करना है। सभी योगाभ्यास करनेवालों को यह ध्यान रखना है कि पहले सूक्ष्म व्यायाम करने हैं। नए अभ्यासी को प्रारंभ में कुछ दिन सूक्ष्म व्यायाम ही करना है, जिससे शरीर व शरीर के सभी अंग आसनों के लिए तैयार हो जाएँ। शरीर में लचीलापन आए। सभी अंग ऊपर-नीचे, दाएँ-बाएँ आराम से हो सके। आसनों को करने से पूर्व तैयारी बहुत ज़रूरी है। वार्मअप करना है।

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