Swami Rama Tirtha Granthavali – 03
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यह पुस्तक श्री रामतीर्थ ग्रन्थावली के खण्ड तीसरे के रूप में प्रकाशित हुई है, जिसमें उनके सदुदेश का भाग तीसरा दिया गया है। शीर्षक-पृष्ठ पर प्रकाशक श्री रामतीर्थ पण्डितकेशन लीग, लखनऊ अंकित है। पैमाना लगभग 130 पृष्ठ का है।
पृष्ठ पर संस्करण-विवरण दिया गया है — प्रथम संस्करण प्रति दो हजार, जून १९२० और उपेट १९७७, तथा वार्षिक मूल्य के हिसाब से सारी अथवा डाक-ट्रय सहित सजिल्ट्ट के कुठक्कर का उल्लेख भी है। नीचे अंग्रेज़ी में लिखा है कि छपाई K. C. Banerjee ने The Anglo-Oriental Press, Lucknow से की और प्रकाशन Swami N. S. Swayam Jyoti, Secretary, The Rama Tirtha Publication League, Lucknow, 1920 के द्वारा किया गया।
विषयानुक्रम में निबंधदर्शन, रामपरिवेश, वास्तविक अग्रामा, धर्म-तत्त्व, ब्रह्मचर्य, शंकरवर दिल्ली, भारतवर्ष की वर्तमान आधारभूतताएँ, हिमालय, सुमेरु दर्शन, भारतवर्ष की स्थिति, आर्य माता और धन मज्जूषा जैसे विषय दिए गए हैं। यह पुस्तक वेदान्त-पाठकों के लिये उपयोगी है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- स्वामी रामतीर्थ की रचनाएँ (भाग 3)
- प्रवचन तथा कविता
- अद्वैत तथा भक्ति
- प्रेरक विचार
पुस्तक की मुख्य बातें
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