Swami Rama Tirtha Granthavali – 22
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यह पुस्तक श्री रामतीर्थ ग्रन्थावली का खण्ड तीसरा है, जिसमें स्वामी रामतीर्थ का सदुदेश-भाग २२ दिया गया है। पैमाना लगभग 159 पृष्ठ का है।
शीर्षक-पृष्ठ पर प्रकाशक श्री रामतीर्थ पब्लिकेशन लीग, लखनऊ अंकित है, साथ में प्रथम संस्करण प्रति दो हजार, अगस्त १९२३ और अवण १९८० की तारीखें तथा फुटकर बिना जिल्द, डाक व्यय रहित अथवा सजिल्ट्ट संस्करण का उल्लेख भी है।इस भाग में स्वामी रामतीर्थ के सदुदेश का बाईसवाँ भाग दिया गया है, जिसमें उनके विचारों का संकलन तथा राम चरित्र से जुड़े प्रकरण मिलते हैं, जो पाठक को उनके साधना-अनुभव से परिचित कराते हैं। पृष्ठ-अंकों के साथ दी गई सूची पाठक को सीधे सही प्रकरण तक पहुँचा देती है।
अगला पृष्ठ विषय-सूची है, जिसमें मनुष्य का ध्रुवत्व, धर्म, तथा राम चरित्र नं. १ और राम चरित्र नं. २ जैसे प्रकरण पृष्ठ-संख्याओं के साथ दिए गए हैं, और नीचे छपाई का विवरण अंग्रेज़ी में दिया गया है, जिसमें लिखा है कि छपाई लखनऊ के ऑपियनल प्रेस में की गई।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- स्वामी रामतीर्थ की रचनाएँ (भाग 22)
- प्रवचन तथा कविता
- अद्वैत तथा भक्ति
- प्रेरक विचार
पुस्तक की मुख्य बातें
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