Swami Rama Tirtha Granthavali – 16
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यह पुस्तक श्री रामतीर्थ ग्रन्थावली का चतुर्थी संस्करण है, जिसमें स्वामी रामतीर्थ का स्वयं लिखा सदुदेश-भाग १६ दिया गया है। पैमाना लगभग 160 पृष्ठ का है।
शीर्षक-पृष्ठ पर प्रकाशक श्री रामतीर्थ पब्लिकेशन लीग, लखनऊ बताया गया है, साथ में प्रथम संस्करण की तारीखें जोछाई १९२३ और आखण १९४७ दर्ज हैं तथा प्रति २०००, फुटकर विना जिल्द, डाक व्यय रहित अथवा सजिल्ट्ट संस्करण का उल्लेख भी है।विषय-सूची में दिए प्रकरणों में आत्मज्ञान, गुरु-कथाश्रम, मोक्ष-संबंधी चर्चा और रामोपदेश जैसे विषयों पर पृष्ठ-संख्याओं के साथ संकेत दिया गया है, और यह अनुक्रम पाठक को विषय को क्रम से समझने में सहायक होता है।
अगले पृष्ठ पर निबंधन दिया गया है, जिसमें श्रीराम जी के वचन और सन् १९०० के आस-पास की घटनाओं का उल्लेख है, और उसके बाद विषय-सूची में गैर मुलाकों के तजुर्बे, आप अपने घर आजानेदमय कैले वना सकते हैं, गुरुकथाश्रम और आत्मात्मभव, मोक्ष खाने की बेदखानीक कहना और संक्रियेत् रामोपदेश जैसे प्रकरण पृष्ठ-संख्याओं के साथ दिए गए हैं।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- स्वामी रामतीर्थ की रचनाएँ (भाग 16)
- प्रवचन तथा कविता
- अद्वैत तथा भक्ति
- प्रेरक विचार
पुस्तक की मुख्य बातें
डाउनलोड कैसे करें — बस 3 कदम
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